आप एक चतुर निवेशक हैं। आप ने व्यक्तिगत वित्त और निवेश के बारे में बहुत कुछ पढ़ा है, और इसलिए आप को अच्छे से पता है कि लंबे समय में सभी परिसंपत्ति वर्गों के बीच शेयर (इक्विटी - equity) निवेश मुद्रास्फीति को पीछे छोड़ता हुआ सबसे अच्छा रिर्टन देता है।

आपको कुछ दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों के लिए बचत की जरूरत है, और जाहिर है, शेयर आपकी पहली पसंद हैं। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आप एक अनुशासित ढंग से निवेश करने का फैसला करते हैं। तो, आप एक डीमेट खाता और एक ट्रेडिंग खाता खोलते हैं और शेयरों में निवेश शुरू करते हैं।

सवाल यह है कि क्या यह सही दृष्टिकोण है? आपको शेयरों में सीधे निवेश करना चाहिए, या विशेषज्ञों की मदद लेना चहिये?

खैर, हर एक व्यक्ति के लिए जवाब दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। तो चलिये, शेयर निवेश के इन दोनों तरीकों की तुलना करते हैं, जिस की मदद से आपको अपना जवाब मिल जायेगा!

पहलू १ – समय

बहुत से छोटे निवेशक शेयरों में अल्पकालीन समय के लिये टिप्स (tips) और अफवाहों (rumours) के आधार पर निवेशकरते हैं , जो निवेश की सबसे अनुचित रणनीति है। यह ट्रेडिंग (trading) है, और यह पद्धति केवल ट्रेडर्स के लिए ही योग्य है। ये वो लोग हैं जो बड़ी पूंजी का निवेश बड़ी शेयर खरीदी (लार्ज पोजिशन – large position) के लिए करते हैं। ऐसे में एक शेयर की कीमत में ५ पैसे की वृद्धि भी उनके लिए बहुत लाभदायक होती है। लेकिन छोटे निवेशकों के लिए यह एक हारी हुई बाज़ी है।

शेयरों में निवेश केवल लंबे समय के लिए किया जाना चाहिए - कंपनी की रणनीति (strategy) और प्रबंधन (management) की सुदृढ़ता ध्यान में रखते हुए। इसलिए शेयरों में निवेश के लिये अनुसंधान (रिसर्च - research) की बहुत जरूरत है। इस में शामिल है बुनियादी विश्लेषण (फंडामेंटल ऐनालिसिस – fundamental analysis) – जो कि एक अध्ययन है बुनियादी कारकों का जो कि एक कंपनी के कार्य और परिणाम को प्रभावित करते हैं। इन कारकों में शामिल हैं उद्योग (industry or sector) जिस में कंपनी काम करती है, उद्योग की विकास दर (growth rate), घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा (competition), समग्र आर्थिक परिदृश्य (ब्याज दर, मुद्रास्फीति, विनिमय दर), आदि।

यह विश्लेषण या अनुसंधान सिर्फ शेयर चुनने से पहले नहीं कि जानी चाहिए, बल्कि निवेश की पूरी अवधि के दौरान लगातार नज़र रखने के लिये भी चाहिये। इस तरह के अनुसंधान के लिये समय के भारी निवेश की ज़रूरत है। क्या आप, एक छोटे से निवेशक, के पास इतना अतिरिक्त समय है?

पहलू २ – विशेषज्ञता (Expertise)

एक कंपनी के विश्लेषण के लिये आवश्यकता है मूल्यांकन (valuation) और लेखांकन (accounting) के सिद्धांतों के संपूर्ण ज्ञान की, और विभिन्न वित्तीय अनुपातों (ratios) जैसे आर. . . (RoE – Return on Equity), आर. . सी. . (RoCE – Return on Capital Employed), आर. . एन. . (RoNW – Return on Net Worth), आदि की व्याख्या की। कंपनियों के ताज़ा वित्तीय परिणामों और अन्य वित्तीय जानकारी की भी आवश्यकता होगी।

बुनियादी विश्लेषण में कंपनी जिस उद्योग (sector) में काम कर रही है उसके ज्ञान की भी आवश्यकता होगी।

क्या आप के पास इस तरह की पहुंच और विशेषज्ञता है?

पहलू ३ – सौदा लागत (Transaction Cost)

एक छोटे निवेशक के रूप में आप के सौदे की मात्रा / मूल्य बहुत मामूली होगी। इसका मतलब है कि ज़्यादातर दलाल (brokers) आप से सबसे ज़्यादा दलाली प्रभार (brokerage) वसूल करेंगे। ध्यान रखें - जैसे-जैसे सौदे का मूल्य बढ़ेगा, दलाली लागत उसके प्रतिशत के रूप में घटती रहेगी।

इस सौदे की लागत का आपके अंतिम रिटर्न पर सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। क्या आप इस के लिए तैयार हैं?

पहलू ४ – प्रतिक्रिया की गति (Reaction Speed)

अगर आर्थिक कारकों में अचानक कोई परिवर्तन आता है, और यह कंपनी को प्रभावित करते हैं, तो क्या आप शांत और तटस्थ भाव से सोच पाने में सक्षम होंगे? क्या आप त्वरित कार्रवाई और प्रतिक्रिया के लिए सक्षम होंगे?

पहलू ५ – निवेश पर नियंत्रण

आप के लिये नियंत्रण” (control) कितना महत्वपूर्ण है? क्या आप फैसला करना चाहते हैं कि कितना निवेश कहाँ करना है? या आप अपने निवेश के लिए एक बाहरी विशेषज्ञ पर भरोसा कर सकते हैं?

म्यूच्युअल फंड (Mutual Fund – MF) के जरिए निवेश के लाभ

१. उनके पास अनुभवी निधि प्रबंधक (fund managers) होते हैं, जिनको शेयर बाजारों की अच्छी समझ होती है।

२. म्यूच्युअल फंडस् में शोधकर्ता (researchers) होते हैं जिनको विभिन्न उद्योगों की गूढ़ जानकारी होती है। उनको विभिन्न मूल्यांकन सिद्धांतों की भी अच्छी तरह से समझ होती है।

३. इन विशेषज्ञों का पूर्णकालिक काम ही कंपनियों का अनुसंधान है, इसलिए ज़ाहिर है कि वह बेहतर तरीके से अच्छी कंपनियों की पहचान कर सकते हैं।

४. म्युचुअल फंड के शोधकर्ता अक्सर कंपनियों के प्रबंधन (management) से सीधे बात करते हैं। इसलिये उनको कंपनी की रणनीति (strategy) की बेहतर समझ होती है।

५. म्युचुअल फंडस् कई निवेशकों से पैसा जमा करते हैं, और उनकी ओर से सामूहिक रूप से निवेश करते हैं। जहिर है इसके परिणामस्वरुप वे बड़े सौदे करते हैं, जिसकी वजह से सौदों की लागत काफ़ी कम लगती है।

६. म्यूच्युअल फंड पैसे की बहुत बड़ी रकम प्रबंधन (manage) करते हैं, क्योंकि वह बहुत से निवेशकों से छोटी राशियाँ जमा करते हैं। इस पैसे को कई अच्छी कंपनियों में निवेश किया जाता है। इसका मतलब यह है कि यदि आप म्यूच्युअल फंड में निवेश करते हैं, तो आप बहुत अच्छी तरह से थोड़ी राशि के साथ भी निवेश में विविधता (diversification) ला सकते हैं।

यदि आप के पास रू 10,000 निवेश करने के लिये हैं, तो शायद आप 2-3 अच्छी कंपनियों के कुछ शेयरों को खरीद सकते हैं। यह निश्चित रूप से विविधता (diversification) नहीं है! लेकिन इसी राशि के साथ आप एक विविध इक्विटी म्युचुअल फंड (diversified mutual fund) के यूनिटों (units) को खरीद सकते हैं, और आपका एक अच्छा विविध पोर्टफोलियो (diversified portfolio) होग!

७. चूंकि म्यूच्युअल फंडस् कोष प्रबंधकों (fund managers) द्वारा प्रबंधित होते हैं जिनका काम ही पैसे का प्रबंध करना है, वह अचानक घटी घटनाओं पर सही समय पर प्रतिक्रिया कर सकते हैं।

कृपया म्युचुअल फंड में निवेश के निम्नलिखित नुकसान को भी ध्यान में रखें

१. नियंत्रण का अभाव: एक बार जब आप निवेश कर देते हैं, एक निवेशक के रूप में आप का कोई नियंत्रण नहीं होता है कि कहां आपके पैसों का निवेश किया गया है – यह निवेश म्युचुअल फंड योजना के निवेश के सिद्धांत पर आधारित होगा।

(ध्यान दें: यह वास्तव में म्युचुअल फंड में निवेश के लिए प्राथमिक कारण हो सकता है - जब आप के पास समय और विशेषज्ञता नहीं है और आपको विशेषज्ञों पर विश्वास है, तो क्यों न उन्हें अपके पैसे का प्रबंधन करने दें!)

इसलिए, आप को म्युचुअल फंड योजना का चयन सावधानी से करना चाहिए, ताकि आपके उद्देश्य उसके निवेश के उद्देश्यों के साथ मेल खाते हों।

यदि आपको विश्वास है कि किसी विशेष क्षेत्र (specific sector) का भविष्य में अच्छा प्रदर्शन रहेगा, तो आप ऐसी म्युचुअल फंड योजना में निवेश कर सकते हैं जो उस क्षेत्र में विशेष रूप से निवेश करती हो - आप एक क्षेत्र फंड (sector fund) में निवेश कर सकते हैं। इस तरह की योजनाएँ काफी जोखिम के साथ आती हैं, क्योंकि उनके निवेश में विविधता (diversification) नहीं है। लेकिन जब आप म्युचुअल फंड में निवेश करते हैं तो आप के पास यही अधिकतम नियंत्रण है।

२. कोई अनुकूलन (customization) नहीं: चूँकि म्यूच्युअल फंड के पास कई ग्राहक होते हैं, वह अपने निवेश को हर ग्राहक के अनुसार अनुकूलित (customize) नहीं कर सकते।

३. प्रबंधन शुल्क (management fee): म्यूच्युअल फंडस् वार्षिक प्रबंधन शुल्क लेते हैं। म्युचुअल फंड अपने निवेश के लिए किये जाने वाले अनुसंधान और अन्य लागत को वसूलने के लिए यह शुल्क लगते हैं। चूंकि यह एक वार्षिक शुल्क है, इसका आपके रिटर्न पर प्रभाव पड़ेगा।

लेकिन, हम यह भी कह सकते हैं कि इस पैसे का उपयोग गहन अनुसंधान के लिये किया जाता है, और इसलिए यह आपके निवेश पर बेहतर रिटर्न प्रदान करता है!

निष्कर्ष

अब आप को म्युचुअल फंड में निवेश के लाभ और कमियां पता हैं। आप यह फैसला करने की बेहतर स्थिति में हैं कि आप शेयरों में सीधे निवेश करना चाहते हैं या म्युचुअल फंड के रास्ते जाना चाहते हैं! यह कुछ पहलू हैं जो आपकी मदद करेंगे तय करने में कि निवेश सीधे शेयर बाज़ार में किया जाए कि म्युचुअल फंड (म्यूच्युअल फंड) में।

एक छोटे निवेशक के बारे में विचार करने पर हम पाते हैं कि वह एक पूर्णकालिक नौकरी (full time job) करता है, और वह केवल अपने वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निवेश करता है। वह मूल्यांकन (valuation) और लेखा (accounting) का विशेषज्ञ नहीं होता। उसके पास कंपनियों के गहरे अनुसंधान के लिए भी समय नहीं होगा ।

तो, एक सामान्य सिद्धांत के रूप में, छोटे निवेशकों के लिए उचित यह है कि म्युचुअल फंड के ज़रिए निवेश करें।

निवेश के लिये शुभकामनाएँ!