एक आम स्थिति

कल्पना कीजिए: आपने जीवन में कई महत्वपूर्ण चीज़ें हासिल करनॆ की योजना बनाई है - खुद‌ का एक घर, जल्दी सेवानिवृत्ति, अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा - सूची लंबी है। और आप नियमित रूप से बचत‌ करतॆ हैं - जब भी आप कॊ बोनस मिलता है, जब भी आप कॊ कुछ बड़े नकद उपहार मिलते हैं, या जभी भी आप कॊ मौका मिलता है। और आप उम्मीद कर रहे हैं कि इस‌ बचत में इतनी वृद्धि हॊ जायॆगी कि आप वॊ सब चीज़ें हासिल कर लेंगे जिन के लिए आपनॆ योजना बनाई है।

और फिर, आप एक विज्ञापन देखतॆ हैं जिस में एक एलसीडी टीवी - जिस कॊ खरीदना आप का सपना है - पर बड़ी छूट का वादा किया गया है।।। तो आप तुरंत अपने निवेश के कुछ भाग का नकदीकरन कर टीवी खरीद लेते हैं, और इसकी भरपाई करने के लिये अपने आप से और अधिक निवेश करने का वादा करते हैं। आप को वह एलसीडी टीवी तो मिल जाता है जो आप हमेशा से चाहते थे, पर आपके निवेश को आकस्मिक हानि होती है।

क्या आपको यह परिस्थिति परिचित लगती है? एलसीडी टीवी के बदले एक छुट्टी (वेकेशन / vacation), एक कार या लैपटॉप रख कर देखें, और आप समझेंगे की यह हम में से किसी के भी साथ हो सकता है। क्या हम में से ज्यादातर लोगों ने जीवन में कभी न कभी अपने कुछ निवेश को बेच कर कुछ अनियोजित नहीं खरीदा है? जीवन की कई अन्य चीजों की तरह बेतरतीब या यादृच्छिक (unplanned) निवेश के साथ समस्या यही है - जब आप का कोइ लक्ष्य (goal) नहीं है, तब ध्यान बँटना बहुत आसान हो जाता है।

क्यूँ चाहिए लक्ष्य आधारित निवेश?

आप को यह पता होना चहिये कि आप बचत किस लक्ष्य के लिये कर रहे हैं, ताकि अगर आप आपना कुछ निवेश बेचने का निर्णय लेते हैं तो इस निर्णय का उस लक्ष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह पता लगाना आसान होगा। आप अपने लक्ष्य की तुलना में अपने निवेश को नाप सकते हैं, ताकि आपको पता चले कि आप अपने लक्ष्य से कितने दूर हैं।

यँही लक्ष्य आधारित निवेश (goal based investing) काम में आता है। यह निवेश के काम को बहुत ही बहुत आसान बनाता है - जरूरत है सिर्फ अनुशासन के साथ नियमित रूप से निवेश करने की। चलिये, इसे विस्तार से समझते हैं।

लक्ष्य आधारित निवेश के विभिन्न चरण

लक्ष्य आधारित निवेश का मतलब है विशिष्ट लक्ष्यों (specific goals) के लिए बचत। इस के लिये निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा (चिंता न करें - हम विस्तार से हर कदम की व्याख्या समझेंगे):

  • अपने जीवन की उन प्रमुख घटनाओं के बारे में सोचें जिन के लिये आपको बड़ी वित्तीय आवश्यकता पड़ेगी, और जिसके लिए आप बचत करना चाहते हैं।
  • इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की आज की लागत खोजें।
  • निर्धारित करें की आज से यह लक्ष्य कितना दूर है (वर्षों में)
  • निर्धारित करें इन लक्ष्यों को उस समय पर प्राप्त करने की लागत (मुद्रास्फीति की एक अनुमानित दर का उपयोग करते हुए)
  • गणना करें आफ़्टर टैक्स रिटर्न की दर की, जो आप आज के निवेश से पा सकते हैं।
  • अगर ज़रुरत हो तो प्रत्येक लक्ष्य के लिए आवश्यक प्रति वर्ष और प्रति माह निवेश की भी गणना कर लें।
  • आज से ही निवेश शुरू करें, इन लक्ष्यों को विशेष रूप से ध्यान में रख कर!

इसको हम एक उदाहरण का उपयोग करके आसानी से समझ सकते हैं। चलिये मान लेते हैं कि आप एक 27 साल की कामकाजी महिला हैं, जो की सबसे ऊँची टैक्स ब्रैकेट में हैं।

यहाँ क्लिक करें इस उदाहरण के लिए वर्कशीट डाउनलोड करने के लिए

चरण १: लक्ष्य निर्धारण

हालांकि कई आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए आप बचत करना चाहेंगे, इस उदाहरण के लिए हम मनते हैं कि आप के केवल दो लक्ष्य हैं:

  • एक अपार्टमेंट खरीदना

  • एक कार खरीदना

 

क्रमांक लक्ष्य
1 एक अपार्टमेंट खरीदना
2 एक कार खरीदना

चरण २: वर्तमान मूल्य निर्धारण

इन लक्ष्यों की लागत आज कितनी है?

जिस क्षेत्र में आपका 2 बेडरूम अपार्टमेंट खरीदने का इरादा है, आज उसकी लागत रुपए 30,00,000 के आसपास है।

जो कार आप खरीदने की योजना बना रहे हैं, उसकि लागत आज रुपए 5,00,000 के आसपास है।

क्रमांक लक्ष्य वर्तमान मूल्य
1 एक अपार्टमेंट खरीदना 30,00,000
2 एक कार खरीदना 5,00,000

चरण ३: समय सीमा निर्धारण

अब तय करें कि आप कब इन लक्ष्यों को हासिल करना चाहते हैं।

आप तय करते हैं कि आप जब आप 50 साल के हो जायें, अपने स्वयं के मकान में रहें। इसका मतलब यह है कि आप के पास 23 साल इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये हैं।

आप आज से 4 वर्षों में कार खरीदना चाहते हैं।

क्रमांक लक्ष्य वर्तमान मूल्य अब से वर्ष
1 एक अपार्टमेंट खरीदना 30,00,000 23
2 एक कार खरीदना 5,00,000 4

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