वित्तीय प्रेस और व्यापारिक टीवी चैनलों पर हम अक्सर मार्केट कैप या मार्केट कैपिटलाइज़ेशन (market cap or market capitalization) शब्द सुनते हैं, और कंपनियों के संदर्भ में लार्ज कैप (large cap), मिड कैप (mid cap) और स्माल कैप (small cap) शब्द सुनते हैं।

आइये समझते हैं कि इन शब्दों का क्या मतलब है। और यह भी देखते हैं की प्रत्येक वर्ग के शेयरों में निवेश करके आप किस तरह के लाभ की अपेक्षा कर सकते हैं।

 मार्केट कैपिटलाइज़ेशन या मार्केट कैप (Market Capitalization / Market Cap)

कंपनी के मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का मतलब है शेयर बाजार द्वारा निर्धारित उस कंपनी का मूल्य।

हर कंपनी शेयर ज़ारी करती है, और जारी किए गए शेयरों की कुल संख्या कंपनी में 100% स्वामित्व हक (100% ownership) को प्रदर्शित करती है। इस प्रकार, यदि हमें किसी कंपनी के द्वारा जारी किए गए कुल शेयरों की संख्या और प्रत्येक शेयर की कीमत पता  हो तो हम उस कंपनी का मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

इस तरह से निर्धारित किये गए कंपनी के मूल्य को मार्केट कैप कहा जाता है।

कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन कंपनी के शेयरों का बाजार मूल्य * जारी किये गए शेयरों की संख्या

शेयर की कीमत का निर्धारण बाजार की शक्तियों – मांग और आपूर्ति (demand and supply) – के द्वारा होता है, जो कि सबसे सही कीमत निर्धारण है। चूँकि मार्केट कैप की गणना में इस कीमत का उपयोग होता है, किसी कंपनी का मार्केट कैप कंपनी के कद को नापने का सर्वोत्तम तरीका है।

शेयर बाजार में कंपनियों को अपने मार्केट कैप के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि प्रत्येक वर्ग अपने कुछ विशेष लक्षण दर्शाता है। चलिये कंपनियों के मार्केट कैप पर आधारित वर्गीकरण को समझें।

लार्ज कैप

लार्ज कैप की कोई मानक परिभाषा नहीं है, और यह एक संस्थान से दूसरे संस्थान के लिए अलग हो सकती है। लेकिन एक सामान्य नियम के रूप में, यदि एक कंपनी का मार्केट कैप 5,000 करोड़ रुपए से अधिक का है तो इसको लार्ज कैप माना जाता है।

एक लार्ज कैप कंपनी आमतौर पर अपने उद्योग में एक हावी खिलाड़ी होती है – यह ज़्यादातर अपने शेत्र में नंबर १ या नंबर २ होती है। इसकी वृद्धि दर (growth rate) काफी स्थिर होती है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारत की लगभग सभी लार्ज कैप कंपनियाँ वैश्विक परिदृश्य में मिड कैप या स्माल कैप कंपनियाँ हैं, क्योंकि दुनिया भर में कंपनियां आमतौर पर लार्ज कैप के रूप में तब वर्गीकृत होति हैं जब उनकी मार्केट कैप 10 अरब डॉलर (लगभग 39,000 करोड़ रुपए) से अधिक हो

मिड कैप

मिड कैप की परिभाषा अस्पष्ट है, और यह भी एक संस्थान से दूसरे संस्थान के लिए अलग हो सकती है। लेकिन एक सामान्य नियम के रूप में यदि एक कंपनी का मार्केट कैप 1000 करोड़ रु. से 5000 करोड़ रुपए के बीच है तो इसको मिड कैप माना जाता है।

एक मिड कैप कंपनी आमतौर पर अपने उद्योग में एक उभरती खिलाड़ी होती है। इस तरह की कंपनियों में तेजी से बढ़ने और भविष्य में एक अग्रणी कंपनी (लार्ज कैप) बनने की संभावना होती है।

मिड कैप कंपनियाँ बहुत अधिक वृद्धि दर (प्रतिशत में) दिखा सकती हैं, क्योंकि उनकी बिक्री और मुनाफा कम होता है - चूँकि उनका आकार छोटा होता है, बिक्री और मुनाफे में छोटी सी वृद्धि भी प्रतिशत के रूप में व्यक्त किये जाने पर एक बड़ी संख्या हो जाती है।

स्माल कैप

लार्ज कैप और मिड कैप कंपनियों की तरह स्माल कैप की परिभाष भी ठोस नहीं हैयह एक संस्थान से दूसरे संस्थान के लिए अलग हो सकती है। लेकिन एक सामान्य नियम के रूप में यदि एक कंपनी का मार्केट कैप 1000 करोड़ रु से कम है तो इसको स्माल कैप माना जाता है।

एक स्माल कैप कंपनी आमतौर पर ऐसी कंपनी होती है जो अपने उद्योग में नयी शुरू हुयी हो। उसकी विकास दर मध्यम से लेकर बहुत उच्च हो सकती है। इस तरह की कंपनियों में तेजी से बढ़ने और भविष्य में एक मिड कैप कंपनी बनने की संभावना होती है।

निवेश करते समय ध्यान में रखने लायक बातें

लार्ज कैप

जोखिम के लिए कम सहनशीलता वाले लोगों को लार्ज कैप कंपनियों में निवेश करना चाहिए, क्योंकि वे काफी स्थिर कंपनियाँ होती हैं जिनका ट्रैक रिकॉर्ड जाना हुआ और लगभग पूर्वानुमानित रहता है। बहुत लंबे समय तक शेयरों में निवेश नहीं करने वाले लोगों को भी इन कंपनियों में निवेश करना चाहिए, क्योंकि इन स्टॉक की कीमतें बहुत अस्थिर नहीं रहती हैं।

मिड कैप

जोखिम के लिए मध्यम सहनशीलता वाले लोगों को मिड कैप कंपनियों में निवेश करना चाहिए क्योंकि ये उभरती हुई कंपनियाँ हैं और इनमें अग्रणी कंपनी न बनने का जोखिम रहता है। यदि सही ढंग से चुना जाये तो मिड कैप कंपनियाँ असाधारण रिटर्न दे सकती हैं। (एक मुख्य उदाहरण इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज है)

लेकिन एक सही मिड कैप कंपनी के चुनाव के लिये बहुत अनुसंधान और विशेषज्ञता की आवश्यकता है। इसलिए मिड कैप कंपनियों में म्युचुअल फंड के माध्यम से निवेश करना बेहतर है।

इसके अलावा एक मिड कैप कंपनी को बड़ी कंपनी बनने में बहुत साल लग सकते हैं। इसलिए केवल लम्बी अवधि के लिए निवेश करने वाले लोगों को मिड कैप शेयरों में निवेश करना चाहिए।

स्माल कैप

केवल ज्यादा जोखिम लेने वाले लोगों को इन कंपनियों में निवेश का विचार करना चाहिए - यह कंपनियां अपने जीवन चक्र के बहुत प्रारंभिक चरणों में रहती हैं, और आम तौर पर उनके विकास की संभावना में काफ़ी ज्यादा अनिश्चितता रहती है।

स्माल कैप कंपनियों की बढौतरी में मिड कैप कंपनियों से भी अधिक समय लग सकता है, लेकिन अगर अच्छी तरह से चुना जाय तो यह असाधारण रिटर्न दे सकती हैं।

स्माल कैप कंपनियों में निवेश केवल म्युचुअल फंड के द्वारा ही किया जाना चाहिए - इनमें प्रत्यक्ष निवेश अटकल लगाने के बराबर ही होगा!

(जानना चाहते हैं शेयरों में निवेश कब सीधा करना चाहिए और कब म्युचुअल फंड्स के ज़रिये? पढ़िए “शेयर निवेश – प्रत्यक्ष (सीधा) निवेश बनाम म्यूच्युअल फंडस् (Mutual Funds – MFs)“)