• शेयरों में निवेश लंबी अवधि के लिए ही करें।
  • शेयर लंबे समय में सबसे ज़्यादा लाभ देते हैं।
  • लंबे समय में इक्विटी से रिटर्न अन्य सभी परिसंपत्ति वर्ग से रिटर्न को पीछे छोड़ देता है।

क्या यह सब आपको परिचित लगते हैं? मुझे यकीन है कि आपने ये कथन कभी न कभी तो सुने ही होंगे!

यह इसलिये क्योंकि यह पूरी तरह से सच है! चलिये जांच करते हैं क्यों।

हम सभी शेयर बाजार की अस्थिरता के बारे में जानते हैं। एक दिन बाजार कुछ प्रतिशत ऊपर जाता है, और अगले दिन वह गिर जाता है! हम सबने यह देखा है, है ना?

क्या इसका मतलब यह है कि शेयर बाजार का रिटर्न अनिश्चित होता है? अल्पावधि में देखा जाय तो - हाँ। कोई भविष्यवाणी नहिं कर सकता है कि बाजार अगले दिन या अगले सप्ताह किस स्तर पर होगा। (तकनीकी विश्लेषण की निरर्थक कसरत भी नहीं - अधिक जानकारी के लिए कृपया पढ़ें तकनीकी विश्लेषण का परिचय“)

लेकिन हम काफ़ी हद तक सही भविष्यवाणी कर सकते हैं कि शेयर बाजार कुछ वर्षों के बाद कहाँ होगा। ऐसा क्यों है? यह समझने के लिये हमको एक शेयर की कीमत को निर्धारित करने वाले कारकों को देखने की जरूरत है।

किसी शेयर की कीमत कैसे निर्धारित होती है?

जवाब आसान है – किसी भी शेयर की कीमत उस शेयर की मांग पर निर्भर करती है। यदि किसी शेयर के लिए अधिक मांग है, तो उसकी कीमत ज्यादा होगी, और अगर किसी शेयर के लिए कम मांग है, तो इसकी कीमत नीचे जायेगी।

लेकिन यह मांग कैसे निर्धारित होती है?

रोज़ बरोज़ की मांग अल्पकालिक कारकों जैसे समाचार प्रवाह, राजनीति, अन्य वस्तुओं की कीमतों में परिवर्तन (जैसे कच्चा तेल), आदि से प्रभावित होती है । इन कारकों में कोई भी परिवर्तन मांग की अस्थिरता का – और इस तरह से शेयरों की कीमतों की अस्थिरता का – कारण बनता है।

लेकिन लंबे समय में, मांग – और शेयर की कीमत – अर्थव्यवस्था की स्थिति, उसकी विकास दर, और निजी कंपनियों की विकास दर पर निर्भर करती है।

चलिये विस्तार से यह समझते हैं।

ज्यादातर कंपनियाँ लाभ (profit) कमाती हैं, और यह लाभ प्रति शेयर व्यक्त करने पर “कमाई प्रति शेयर” या ईपीएस (Earnings Per Share – EPS) कहलाता है। जब लोग किसी कंपनी में निवेश करते हैं, वे कीमत के रूप में इस ईपीएस का एक निश्चित गुणाँक देने को तैयार रहते हैं। यह गुणाँक पीई अनुपात (Price to Earnings, or PE Ratio) कहलाता है।

सामान्य रूप से कम्पनियाँ हर वर्ष बढती हैं - उनकी बिक्री (revenue) बढ़ती है, और उनके लाभ (profit) भी बढ़ते हैं। (कम से कम हमें निवेश के लिए केवल उन्हीं कंपनियों पर विचार करना चाहिए जो कि बढ़ रही हैं, या जिनमें बढ़ने की क्षमता है)

इसका मतलब यह है कि उनके ईपीएस (EPS) में भी आने वाले वर्षों में वृद्धि होगी। अब, यदि निवेशक वही पीई (PE) गुणाँक पर कंपनी के शेयर की कीमत का भुगतान करने के लिए तैयार हैं, तब भी इसके शेयर की कीमत बढ़ जायेगी – क्योंकि इसका ईपीएस (EPS) बढ़ गया है।

उदाहरण

मानिए की एक कंपनी की ईपीएस 10 रुपये है, और 12 के पीई के साथ इसमें लेन-देन चल रही है। इस प्रकार, उसके शेयर की कीमत 120 रू होगी।

दो साल के बाद, यदि इसका ईपीएस 15 रुपये है, तो पी 12 ही रहने पर भी इसकी कीमत 180 रु होगी।

(एक कंपनी की पीई भी कंपनी की विकास दर और उसके भविष्य की संभावनाओं के आधार पर परिवर्ततित होती है। अधिक जानकारी के लिए कृपया पढ़ें री-रेटिंग डिमिस्टिफ़ाइड“)

इस प्रकार, एक कंपनी का शेयर-मूल्य स्वाभाविक रूप से उसके लाभ में वृद्धि के आधार पर लंबे समय में ऊपर जायेगा।

और इसलिए, शेयरों में लंबी अवधि के लिए निवेश हमेशा पैसा बनाता है।

बेशक, चुनौती है ऐसी कंपनियों में निवेश करना जो बढ़ रही हैं और बढ़ती रहेंगी। ऐसी कंपनियों की खोज के लिये काफी विशेषज्ञता और समय की आवश्यकता है। इसलिए, शेयर बाजार में निवेश म्युचुअल फंड के द्वारा कना बुद्धिमानी है, जो आप के बदले सारे मुश्किल काम कर देगा! इस बारे में ज्यादा जानने के लिये कृपया पढ़ें शेयर निवेश – प्रत्यक्ष (सीधा) निवेश बनाम म्यूच्युअल फंडस् (Mutual Funds – MFs)

आयकर के नज़रिए से भी शेयर एक अनुकूल चित्र प्रस्तुत करते हैं -स्टॉक से दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (long term capital gain) आय कर से मुक्त है! यह एक और कारण है शेयरों में लंबे समय के लिए निवेश करने के लिए।

“लम्बी अवधि” मतलब कितना लम्बा समय?

दीर्घावधिकी परिभाषा क्या है? मेरा मानना है कि शेयरों के लिए लंबे समय का मतलब है कम से कम 5 साल। यह समय शेयर की कीमतों से सभी अल्पावधि उतार चढ़ाव के प्रभाव को दूर करने के लिये काफ़ी है। मेरी राय में यह कम से कम समय है जिस में एक कंपनी के शेयर मूल्य में उस कम्पनी की तरक्की का सही प्रभाव पता चलता है।

सबूत

चलिये देखें कि क्या भूतकाल में मिले रिटर्न मेरी राय का समर्थन करते हैं!

निवेश 5 वर्ष में लाभ 10 वर्ष में लाभ 15 वर्ष में लाभ
इक्विटी 35% 16% 17%
सोना 10% 7% 13%
पीपीएफ 9.5% 12% 12%
बैंक एफडी 8.5% 12.5% 13%
रियल एस्टेट 30% 14% 11%

तो, हम देखते हैं कि शेयर लंबे समय में अन्य परिसंपत्ति वर्ग को पीछे छोड़ देते हैं ! (स्टॉक और कुछ अन्य परिसंपत्ति वर्गों के बीच में फर्क यद्यपि मामूली लगता है (उदाहरण के लिए रीयल एस्टेट में), लंबे समय में यह आपके निवेश के विकास पर भारी प्रभाव डाल सकता है। अधिक जानकारी के लिये पढ़ें लक्ष्य आधारित निवेश